भाजपा का 'मिशन मार्च': संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी और जातीय समीकरणों का नया चक्रव्यूह
Preparations for major organizational changes and a new
लखनऊ। राजनीतिक पारा चढ़ने के बीच जहां सभी दल चुनावी चौसर बिछाने में जुटे हैं, वहीं मार्च में भाजपा का फोकस संगठन की संरचना पर है। 98 संगठनात्मक जिलों में से चार में अध्यक्ष की घोषणा होनी है, वहीं छह क्षेत्रीय अध्यक्षों पर विरोधी दलों की भी नजर टिकी हुई है।
सपा के पीडीए को भेदने के लिए भाजपा जातीय समीकरण का पूरा ध्यान रखेगी, लेकिन पार्टी की सुई काशी क्षेत्र के जातीय गणित पर अटकी है, जहां के बाद अन्य क्षेत्रों के समीकरण तय होंगे। इस बार छह में से दो चेहरे ओबीसी व एक अनुसूचित समाज से अध्यक्ष बनाने की चर्चा है।
राजनीतिक रूप से सर्वाधिक प्रभावशाली क्षेत्र काशी में कुर्मी समाज के दिलीप पटेल अध्यक्ष हैं। इसी समाज से प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी आते हैं, ऐसे में दो बार क्षेत्रीय अध्यक्ष रहे पटेल की जगह नया जातीय समीकरण अपनाया जा सकता है।
सीएम योगी की सहमति का रखा जाएगा ध्यान
वह कुर्मी समाज से आने वाले तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह के कार्यकाल में भी क्षेत्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। गोरखपुर क्षेत्र में सहजानंद राय क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं, जहां अध्यक्ष मुख्यमंत्री योगी की सहमति और पसंद का ध्यान रखा जाएगा।
कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में राम प्रकाश पाल पिछड़ा वर्ग से आते हैं, जहां राजनीतिक उथल पुथल एवं अंदरुनी कलह पार्टी के लिए चुनौती बनी। यहां अब जातीय कार्ड बदलने की चर्चा है। अवध, कानुपर एवं गोरखपुर क्षेत्र में ब्राहृमणों की संख्या ज्यादा है, जिसमें से किसी एक जगह दायित्व मिल सकता है।
पश्चिम क्षेत्र में जाट के बाद ठाकुर चेहरा आजमाया गया, जहां इस बार गुर्जर, वैश्य, ब्राहृमण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग ने भी दावा जताया है। ब्रज क्षेत्र में दुर्गविजय शाक्य क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं। इस क्षेत्र में शाक्य एवं लोध दोनों फैक्टर प्रभावशाली है। पार्टी इस बार लोध समाज के चेहरे को अवसर दे सकती है।
हालांकि यहां से क्षत्रिय एवं ब्राहमण समाज के दो चेहरों ने अपना भी दावा जताया है। अवध क्षेत्र में युवा चेहरा कमलेश मिश्रा क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं, जहां इस बार क्षत्रिय चेहरे को अवसर देने की चर्चा है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का कहना है कि हम सर्वसमाज को लेकर चलते हैं। सभी का सम्मान रखा जाएगा।